Monday, July 26, 2010


बातें
आप कभी अपने आप से 

 करते हैं बातें ....
आप कहेंगे  सनकी हूँ
जो खुद से बातें करुँ
...पर वो करती है
बातें अपने आप से
खुद से ही सवाल करती
जवाब तलाशती 

कई बार हंसती
जाने क्या बोलती हुई
कभी सहसा कुछ फैलता जाता 
कोरों से बह निकले को आतुर
वो समेटती  उसे
छुपाती पलकों के भीतर
फिर कुछ बुदबुदाती
जैसे हिदायद दे रही हो
समझा रही हो खुद को 

कितनी सारी बातें
हंसी की ख़ुशी की
उदासी की समझाइस  की
निराशा की हौसले की
वो करती रहती अपने आपसे 

पर हज़ार कोशिशों के बाद भी
कई बार उसकी बातें
उतर ही आती उसकी आँखों में
झलकने लगती चेहरे पर 

ऐसे ..जैसे
बरस जाना चाहती हों
बूँद बनकर
घुल जाने के लिए
मिटटी में 
जैसे उड़ जाना चाहती हों
सोंधी खुशबू  बनकर
बादल  में
एक बार फिर
बूँद बनकर बरस जाने को
वो सारी बातें
जो करती है वो अपने आप से
................
( अपनी एक दोस्त पर )

15 comments:

  1. शानदार! स्त्री ह्रदय की अनुभूतियों का सजीव चित्रण. शुभकामनाएँ!

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  2. "पर हज़ार कोशिशों के बाद भी
    कई बार उसकी बातें
    उतर ही आती उसकी आँखों में
    झलकने लगती चेहरे पर"

    बहुत खूब

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  3. सुन्‍दर कविता, धन्‍यवाद.

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  4. पर हज़ार कोशिशों के बाद भी
    कई बार उसकी बातें
    उतर ही आती उसकी आँखों में
    झलकने लगती चेहरे पर
    hakikat jaisi lagi
    ek dm natural lagi
    thanks and welcome

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  5. Bahut aachi kavita hai. Keep writing
    Welcome to blogging

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  6. बहुत खूब.....ख़ूबसूरत एहसास के साथ लिखा है आपने.....आपका ब्लॉग पसंद आया ....अच्छा आगाज़ है ....उम्मीद करता हूँ आगे भी अच्छा पड़ने को मिलेगा इसलिए आपके ब्लॉग को फ़ॉलो कर रहा हूँ |...शुभकामनाये|

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  7. अरे आपके ब्लॉग पर तो फ़ॉलो का आप्शन ही नहीं है उसे ज़रूर लगायें...ताकि लोग आपके ब्लॉग की हर पोस्ट से अपडेट हो सकें | और हो सके तो कमेंट्स से वर्ड वेरिफिकेशन हटा दे |

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  8. उफ़....दोस्तों का ऐसा ख्याल....वो भी इत्ते प्यारे शब्दों में....तो फिर आपके जैसे दोस्त सबके क्यूँ ना हों....!

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  9. great efforts lead great results

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  10. वाह बहुत ही अच्छी कविता है. पढकर मन प्रसन्न हुआ.

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  11. उम्दा बहुत उम्दा

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  12. इस सुंदर से नए चिट्ठे के साथ आपका हिंदी ब्‍लॉग जगत में स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  13. uhh...itne comment pahle se hi hain...badhiya kavita

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  14. yr poetry makes heart silent and mind speechless,so no comments to say...

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