मैदान में आने से पहले ही
जीतना था जिनको
वे असल खिलाडी तो जीत चुके
बची ही नहीं अब बाज़ी
जितना मर्ज़ी
कूदो फादों, दौड़ो भागो
लो गुलटियाँ
वे मंद मंद मुस्कुराते रहेंगे
बिना किसी शिकन , शर्म के
छाती चौड़ी किए
इसमें हैरान होने जैसा नहीं कुछ
जो लोकतंत्र को खेल
बैठे हैं जीत कर
उन्हें तो खेल में खेल कर
खेल से पहले
जीतना ही था ...